1.70 लाख का भुगतान, काम नदारद… जियो टैगिंग से इंजीनियर तक कटघरे में
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में मनरेगा (अब ‘जी राम जी’ – VB-G RAM G) के नाम पर सरकारी खजाने में सेंधमारी का एक और बड़ा मामला सामने आया है।
रायपुर जिले के आरंग जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कठिया में बकरी शेड निर्माण के नाम पर लाखों का भुगतान कर दिया गया, जबकि धरातल पर काम सिर्फ खुदाई तक सीमित है।
कागजों में कार्य पूर्ण, ज़मीन पर ना दीवार, ना छत, ना शेड —
और सरकारी रिकॉर्ड में 1,70,998 रुपये हजम।
मस्टर रोल में 1 मजदूर, भुगतान सिर्फ 261 रुपये
घोटाले की परतें खोलने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं—
मस्टर रोल में सिर्फ एक मजदूर दर्ज
मजदूर को भुगतान दिखाया गया महज 261 रुपये
जबकि बिना काम पूरा हुए ही 1,70,998 रुपये का भुगतान
मौके पर केवल कुछ फुट गहरे गड्ढे
तो सवाल उठता है—
👉 लाखों का भुगतान गया कहां?
👉 किसके इशारे पर हुआ क्लियरेंस?
जियो टैगिंग, सत्यापन और मूल्यांकन… तीनों में खेल?
मनरेगा के नियम बेहद साफ हैं, फिर भी यहां हर स्तर पर गड़बड़ी की बू आ रही है—
🔴 जियो टैगिंग
हर चरण की फोटो लोकेशन के साथ अनिवार्य
❓ गड्ढों की जगह “पूर्ण शेड” की फोटो पोर्टल पर कैसे अपलोड हुई?
🔴 भौतिक सत्यापन
उप-अभियंता को मौके पर जाकर निरीक्षण करना होता है
❓ बिना देखे ही रिपोर्ट ओके कैसे?
🔴 इंजीनियरिंग मूल्यांकन
काम पूरा होने के बाद ही राशि स्वीकृत
❓ शून्य निर्माण पर लाखों का मूल्यांकन किसने किया?
23 सितंबर 2025 को मिली थी मंजूरी
जिला पंचायत रायपुर के मनरेगा प्रकोष्ठ ने 23 सितंबर 2025 को बकरी शेड निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति दी थी।
यह योजना बिहान से जुड़ी दीदियों की आजीविका बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई थी।
लागत ढांचा
कुल लागत: ₹3.25 लाख
मनरेगा से: ₹2 लाख
हितग्राही अंशदान: ₹1.25 लाख
लेकिन हितग्राही महिलाओं को इसकी भनक तक नहीं, और उनके नाम पर राशि पहले ही निकल चुकी है।
‘विकसित भारत’ के नाम पर खुला खेल
इस पूरे मामले में अधिकारियों–बिचौलियों की मिलीभगत साफ नजर आ रही है।
ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की योजना को लूट का जरिया बना दिया गया।
क्या बोले जनपद CEO?
मामले पर आरंग जनपद पंचायत के CEO अभिषेक बनर्जी ने कहा—
“लल्लूराम डॉट कॉम के माध्यम से जानकारी मिली है। जिला पंचायत के उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर जांच कराई जाएगी।”
अब बड़े सवाल
बिना छत-दीवार बने कार्य पूर्ण प्रमाण पत्र किसने दिया?
जियो टैगिंग में फर्जीवाड़ा किसके संरक्षण में हुआ?
भुगतान पर जनपद के जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों?
क्या होगी रिकवरी और एफआईआर?
यह सिर्फ एक पंचायत नहीं… सिस्टम की पोल
आरंग का यह मामला बताता है कि कैसे ग्रामीण विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है,
और क्या दोषियों पर सिर्फ जांच होगी या ठोस एक्शन भी?
