2086 नन्हें जीवन कुपोषण से मुक्त, पोषण पुनर्वास केंद्र से लौट रही मुस्कान
रज्जू बंजारे “वैभवी टाइम्स”
बेमेतरा । जिले में कुपोषण जैसी गंभीर सामाजिक चुनौती के विरुद्ध जिला अस्पताल बेमेतरा स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) आशा की एक मजबूत किरण बनकर उभरा है। यह केंद्र न केवल कुपोषित बच्चों को नया जीवन दे रहा है, बल्कि उनके भविष्य को भी सुरक्षित कर रहा है।
यहां 1 माह से 5 वर्ष तक के गंभीर एवं अति-कुपोषित बच्चों को वैज्ञानिक उपचार एवं संतुलित पोषण के माध्यम से सुपोषित किया जा रहा है।एनआरसी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, एएनएम एवं चिरायु टीम द्वारा चिन्हित बच्चों को भर्ती कराया जाता है, वहीं अभिभावक स्वयं भी बच्चों को केंद्र में लाकर भर्ती करा सकते हैं।
बच्चों को 15 दिनों तक विशेष देखरेख में रखकर थेराप्यूटिक फूड (F-75, F-100), फार्मूला मिल्क एवं पौष्टिक आहार प्रदान किया जाता है। लंबे समय से दस्त, बार-बार बीमार पड़ने अथवा अत्यधिक कमजोरी से ग्रसित बच्चों का भी यहां प्रभावी उपचार किया जाता है।
केंद्र में बच्चों को दलिया, हलवा, खिचड़ी, इडली, सेवई जैसे पोषक नाश्ते दिए जाते हैं। साथ ही माताओं को दिन में दो समय का भोजन तथा 15 दिवस हेतु ₹150 प्रतिदिन की दर से कुल ₹2250 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। एनआरसी में उपलब्ध समस्त उपचार एवं सुविधाएं पूर्णतः निःशुल्क हैं।
13 वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धिजिला अस्पताल बेमेतरा के एमसीएच भवन में जनवरी 2013 से संचालित इस केंद्र में अब तक कुल 2086 बच्चे कुपोषण से मुक्त होकर स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर हुए हैं, जो जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
वर्षवार सुपोषित बच्चों की संख्या
2013-14 – 87 | 2014-15 – 127 | 2015-16 – 1492016-17 – 134 | 2017-18 – 225 | 2018-19 – 2082019-20 – 213 | 2020-21 – 88 | 2021-22 – 332022-23 – 180 | 2023-24 – 221 | 2024-25 – 22401 अप्रैल 2025 से 09 फरवरी 2026 – 197कुल सुपोषित बच्चे – 2086
कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देशन में सीएमएचओ डॉ. अमृत लाल रोहलेडर एवं सिविल सर्जन डॉ. लोकेश साहू के मार्गदर्शन में यह केंद्र संचालित हो रहा है। अस्पताल प्रमुख सलाहकार डॉ. स्वाति यदु, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक कुमार निराला एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. पवन वर्मा के नेतृत्व में समर्पित चिकित्सा टीम द्वारा बच्चों की सतत निगरानी की जा रही है।
इस अभियान में फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर श्रीमती दीप्ति धुरंधर, स्टाफ नर्स कु. अंकिता वर्मा, श्रीमती लक्ष्मी परगनिहा, ममता वर्मा, धनेश्वरी साहू, रोहिणी चंद्राकर एवं भोजन व्यवस्था संभाल रहीं श्रीमती नमिता दुबे की भूमिका सराहनीय रही है।
इनके सामूहिक प्रयासों से कुपोषित बच्चों को नया जीवन मिल रहा है, जिससे जिले के साथ-साथ राज्य एवं देश स्तर पर कुपोषण की दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।
