रज्जू बंजारे “वैभवी टाइम्स”
बेमेतरा। जिले में इस वर्ष केवल 552 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य औसत से काफी कम है। अल्प वर्षा के चलते भू-जल स्तर में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए Central Ground Water Board द्वारा बेमेतरा जिले के तीन विकासखण्डों को ‘क्रिटिकल ज़ोन’ घोषित किया गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समय रहते प्रभावी जल संरक्षण उपाय नहीं अपनाए गए तो आगामी महीनों में पेयजल संकट गहरा सकता है।
जिला प्रशासन ने पूर्व में ही किसानों से ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं अन्य कम पानी में तैयार होने वाली वैकल्पिक फसलों को अपनाने की अपील की थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि ग्रीष्मकालीन धान की खेती में अत्यधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है, जिससे भू-जल दोहन बढ़ता है और पेयजल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
इसके बावजूद कुछ स्थानों पर निर्देशों की अनदेखी कर धान की खेती जारी रहने पर कलेक्टर महोदया ने पेयजल संरक्षण अधिनियम के तहत पूरे जिले को जल अभाव क्षेत्र घोषित कर दिया है। यह निर्णय आमजन को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और भविष्य के संभावित संकट को टालने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निर्देशों के उल्लंघन पर प्रशासन ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, राजस्व, कृषि, पुलिस, विद्युत एवं जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीम गठित कर सख्त कार्रवाई की।संयुक्त दल ने गुनरबोड़, जेवरी, अमोरा, बावनलाख, भिंभौरी, अतरगढ़ी और बुढ़ा जौंग सहित 7 गांवों में 20 ट्रांसफॉर्मरों से बिजली प्रवाह बाधित किया, ताकि अवैध सिंचाई रोकी जा सके।
इसके अलावा शिवनाथ नदी से अवैध रूप से ग्रीष्मकालीन धान की सिंचाई करते पाए जाने पर जल संसाधन विभाग के उड़नदस्ता दल ने भाठासोरी, तबलखोर, परपोड़ा, ताकम, पाथरपूंजी, सिँवार और सलधा सहित 16 गांवों में छापेमारी कर कुल 45 पंप जब्त किए। इन पंपों के माध्यम से नदी एवं अन्य स्रोतों से अनधिकृत जल दोहन किया जा रहा था।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई दंडात्मक से अधिक जनहित में उठाया गया आवश्यक कदम है। पेयजल संकट की आशंका को देखते हुए आगे भी निरंतर निरीक्षण और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।कलेक्टर महोदया ने किसानों से पुनः अपील की है कि वे जल संकट की गंभीरता को समझें, प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें तथा कम पानी वाली फसलों को अपनाकर जिले में जल संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय सहयोग दें।
जिला प्रशासन ने संकेत दिया है कि भविष्य में निर्देशों की अवहेलना पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सीमित जल संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित कर आम नागरिकों के लिए सुरक्षित पेयजल उपलब्धता बनाए रखना है।
