रज्जू बंजारे “वैभवी टाइम्स”
बेमेतरा। जिले को नशामुक्त बनाने के दावों और बैठकों के बीच जमीनी हालात पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिला कार्यालय में आयोजित बैठक में कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं और पुलिस अधीक्षक रामकृष्ण साहू ने नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर सख्ती की बात कही, लेकिन आम नागरिकों का कहना है कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में नशे का कारोबार लगातार फैल रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार कई इलाकों में खुलेआम नशीले पदार्थों की बिक्री हो रही है। युवाओं के बीच नशे की लत तेजी से बढ़ रही है, जिससे चोरी, झगड़े और अन्य आपराधिक घटनाओं में इजाफा देखा जा रहा है। सवाल यह है कि यदि प्रशासन को “हॉटस्पॉट” की जानकारी है, तो अब तक ठोस और स्थायी कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई?
कार्रवाई की घोषणाएं, परिणाम कब?
बैठक में विशेष अभियान, छापामार कार्रवाई और नेटवर्क तोड़ने की बात कही गई, लेकिन पूर्व में भी ऐसे अभियान चलाए जाने के दावे किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा।कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि नशे का अवैध कारोबार स्थानीय स्तर पर संरक्षण के बिना संभव नहीं है। यदि प्रशासन वास्तव में गंभीर है, तो बड़े सप्लायर और सरगनाओं तक पहुंचना जरूरी है, न कि केवल छोटे स्तर पर कार्रवाई कर आंकड़े प्रस्तुत करना।
नशामुक्ति केंद्रों की स्थिति भी सवालों में
नशे के शिकार युवाओं के उपचार और पुनर्वास की बात कही गई, लेकिन जिले में उपलब्ध नशामुक्ति सेवाओं की क्षमता और प्रभावशीलता पर भी प्रश्न उठ रहे हैं। कई परिवारों का कहना है कि परामर्श और उपचार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे पीड़ितों को समय पर मदद नहीं मिल पाती।
जनता की मांग, दिखे ठोस परिणाम
लोगों का कहना है कि अब केवल बैठकों और बयानों से काम नहीं चलेगा। लगातार निगरानी, पारदर्शी कार्रवाई और दोषियों पर कड़ी सजा ही नशे के जाल को तोड़ सकती है।जब तक जमीनी स्तर पर प्रभावी और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं दिखेगी, तब तक नशामुक्ति के दावे केवल कागजी साबित होंगे
