वैज्ञानिक जैविक खेती से मूलचंद बंजारे ने बढ़ाया उत्पादन, कीट-रोगों से मिली राहत
पंकज कुमार बघेल
मुंगेली, वैभवी टाइम्स
विकासखण्ड पथरिया के ग्राम मोहदी निवासी कृषक मूलचंद बंजारे ने वैज्ञानिक एवं जैविक खेती अपनाकर अपनी कृषि पद्धति में उल्लेखनीय बदलाव किया है। राज्य पोषित जैविक खेती मिशन योजना के माध्यम से उन्होंने न केवल फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में वृद्धि की, बल्कि खेती की लागत घटाकर अपनी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया है।
कुल 1.224 हेक्टेयर कृषि भूमि पर खेती करने वाले किसान पूर्व में रासायनिक खेती करते थे। इससे फसलों में कीट एवं रोगों का प्रकोप बना रहता था और अधिक लागत के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। समस्या के समाधान हेतु उन्होंने कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी गेंदलाल पात्रे से संपर्क किया।
कृषि विभाग के मार्गदर्शन में राज्य पोषित जैविक खेती मिशन के अंतर्गत हरी खाद सनई बीज की बोनी कर उन्नत एवं वैज्ञानिक पद्धति अपनाई गई। इस दौरान प्रमाणित बीज का उपयोग, बीज उपचार, ट्रायकोडर्मा से बीज शोधन, पीएसबी कल्चर का प्रयोग तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन किया गया। साथ ही ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई, समय पर जिंक सल्फेट का प्रयोग एवं गभोट अवस्था में प्रति एकड़ 2 किलोग्राम बोरान का छिड़काव भी किया गया।
इन वैज्ञानिक उपायों के सकारात्मक परिणाम सामने आए। फसलों में कीट एवं रोगों का प्रकोप कम हुआ, उत्पादन लागत घटी और धान की फसल से निर्धारित उत्पादन लक्ष्य प्राप्त हुआ। बेहतर उपज और गुणवत्ता के चलते किसान की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
किसान मूलचंद बंजारे का कहना है कि जैविक एवं वैज्ञानिक खेती न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि दीर्घकाल में किसानों के लिए अधिक लाभकारी भी सिद्ध होती है। कृषि विभाग की योजनाओं और तकनीकी मार्गदर्शन का सही उपयोग कर किसान खेती को लाभ का मजबूत साधन बना सकते हैं।
