पंकज कुमार बघेल, मुंगेली,वैभवी टाइम्स
लोरमी।
शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह वातावरण, संवेदना और समर्पण से भी आकार लेती है। इसी सोच को साकार करते हुए विकासखंड लोरमी अंतर्गत संकुल केंद्र लीलापुर के शासकीय प्राथमिक शाला सेनगुड़ा के प्रधान पाठक अशोक कुमार टोण्डे ने अपने निजी व्यय से विद्यालय को नया स्वरूप देकर शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
प्रधान पाठक की इस सराहनीय पहल के अंतर्गत विद्यालय परिसर में आकर्षक रंग-रोगन कराया गया है। विद्यालय की दीवारों पर शैक्षणिक चित्र, वर्णमाला, गणितीय संकेत, नैतिक मूल्यों से जुड़े प्रेरक सुविचार, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक जिम्मेदारियों से संबंधित संदेशों को रचनात्मक ढंग से उकेरा गया है।
इन प्रयासों से विद्यालय अब केवल अध्ययन का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सीखने और समझने का आनंददायक स्थल बन गया है।
इस परिवर्तन का सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों के व्यवहार और सीखने की प्रवृत्ति में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बच्चे अब पहले की अपेक्षा अधिक उत्साह और प्रसन्नता के साथ विद्यालय आ रहे हैं।
उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और पढ़ाई के प्रति रुचि व जिज्ञासा भी बढ़ी है। विद्यालय का सुंदर और प्रेरक वातावरण बच्चों में अनुशासन, स्वच्छता तथा नैतिक मूल्यों के प्रति भी जागरूकता पैदा कर रहा है।
प्रधान पाठक अशोक टोण्डे का कहना है कि शिक्षा तभी प्रभावी होती है जब बच्चों को अनुकूल और प्रेरक वातावरण मिले। सकारात्मक माहौल बच्चों के मन-मस्तिष्क को सीखने के लिए तैयार करता है और उनमें अपनत्व की भावना विकसित करता है।
उनका मानना है कि यदि शिक्षक अपने कर्तव्य से आगे बढ़कर प्रयास करें, तो सरकारी विद्यालय भी उत्कृष्ट शिक्षा के केंद्र बन सकते हैं।
विद्यालय में हुए इस व्यापक सकारात्मक बदलाव की प्रशंसा अभिभावकों, ग्रामवासियों एवं शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही है। ग्रामवासियों का कहना है कि इस पहल से न केवल विद्यालय की छवि बदली है, बल्कि बच्चों के भविष्य को लेकर उनका विश्वास भी मजबूत हुआ है।
यह प्रयास अन्य शिक्षकों और विद्यालयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर सामने आया है, जो शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।
