रज्जू बंजारे “वैभवी टाइम्स”
मुंगेली/पथरिया । मुंगेली जिले के पथरिया क्षेत्र ग्राम चंदली निवासी एवं समाजसेवी राजकुमार सतनामी के विश्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने पर जिलेभर में हर्ष और गर्व का माहौल देखने को मिला। लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के बाद जब राजकुमार सतनामी का मुंगेली आगमन हुआ, तो सतनामी समाज सहित सभी धर्म-संप्रदाय के लोगों ने जगह-जगह आतिशबाजी, पुष्पवर्षा और डीजे के साथ भव्य स्वागत किया।
राजकुमार सतनामी एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन उनके सपने और संकल्प असाधारण रहे हैं। मात्र 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने सामाजिक जागरूकता अभियानों की शुरुआत की और कम उम्र में ही मुंगेली जिले के सतनामी समाज के अध्यक्ष बने। इसके साथ ही वे प्रदेश के सबसे कम उम्र के पंजीकृत संगठन के प्रदेश अध्यक्ष भी बने, जो अपने-आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
अपने निरंतर सामाजिक कार्य, जनजागरण अभियानों और समाज के प्रति समर्पण के चलते राजकुमार सतनामी को अब तक प्रदेश स्तर पर अनेक सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू द्वारा उन्हें “सामाजिक योद्धा सम्मान” से भी सम्मानित किया गया है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर वे तीन बार विभिन्न प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं।राजकुमार सतनामी के सामाजिक योगदान, लगन और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम ने लंबे समय तक गहन चिंतन और मूल्यांकन के बाद उनका नाम विश्व रिकॉर्ड में दर्ज किया।
इस ऐतिहासिक क्षण के लिए वे दिल्ली पहुंचे, जहां उन्हें औपचारिक रूप से लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान दिया गया।
मुंगेली जिले के ग्राम पंचायत चंदली में उनके स्वागत का दृश्य बेहद भावुक और प्रेरणादायक रहा। सभी धर्म-संप्रदाय के लोग एकजुट होकर डीजे की धुन पर नाचते-गाते और आतिशबाजी करते नजर आए, जो सामाजिक समरसता और भाईचारे का जीवंत उदाहरण बना।
इस अवसर पर राजकुमार सतनामी ने कहा,“यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं है। यह मेरे समाज, मेरे जिले और सभी धर्म-संप्रदाय के लोगों का सम्मान है। यह विश्व रिकॉर्ड मैं सतनामी समाज सहित सभी धर्मों को समर्पित करता हूं। अगर एक साधारण परिवार का युवा मेहनत, ईमानदारी और सेवा भाव से आगे बढ़े, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।”राजकुमार सतनामी की यह उपलब्धि न सिर्फ मुंगेली जिले बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि उम्र, संसाधन या परिस्थितियां सफलता की सीमा तय नहीं करतीं—बल्कि समाज के प्रति समर्पण, सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास ही सच्ची पहचान बनाते हैं।
इस कार्यक्रम उसे उपस्थित आसपास के गांव के लोग एवं बालोद जिला क्रांतिकारी सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण महिलाएंगे जीवन पात्रे , नरेंद्र डहरिया ,राजेश सतनामी राजेंद्र सतनामी ,अमन बंजारे, प्रीतम बंजारे, सत्य पात्रे , शत्रोहन, तीरथ,विमल, अभिषेक, एवं समस्त सभी धर्म संप्रदाय के लिए उपस्थित रहे।
