पंकज कुमार बघेल
मुंगेली, वैभवी टाइम्स
पथरिया विकासखण्ड के ग्राम सांवतपुर की उषा जांगड़े ने स्वसहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की एक मिसाल कायम की है। कभी सीमित आय, घरेलू जिम्मेदारियों और आर्थिक असुरक्षा से जूझने वाली उषा जांगड़े आज एक सफल महिला उद्यमी के रूप में न केवल अपने परिवार का सहारा बनी हैं, बल्कि समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।
स्वसहायता समूह से जुड़ने से पूर्व उषा की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी। परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना कठिन था और भविष्य को लेकर निरंतर चिंता बनी रहती थी। ऐसे कठिन समय में स्वयं सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ।
समूह की नियमित बैठकों, बचत की आदत और आपसी सहयोग से उनमें आर्थिक समझ विकसित हुई। समूह के माध्यम से प्राप्त ऋण सुविधा ने उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया। आत्मविश्वास के साथ उन्होंने सिलाई, कढ़ाई एवं हस्तनिर्मित उत्पादों का कार्य प्रारंभ किया। शुरुआत में उनकी मासिक आय लगभग 4 हजार रुपये थी, किंतु निरंतर मेहनत, उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार और बाजार से बेहतर जुड़ाव के कारण उनकी आय में लगातार वृद्धि होती चली गई।
स्वसहायता समूह के सहयोग से उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण, कच्चा माल तथा बाजार तक सीधी पहुंच मिली, जिससे उनके उत्पादों की मांग बढ़ी। आज उषा प्रतिमाह 50 से 60 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
इस आर्थिक सफलता का सीधा प्रभाव उनके परिवार के जीवन स्तर पर पड़ा है। बच्चों की शिक्षा अब नियमित और बेहतर हो रही है, वहीं परिवार की पोषण, स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यकताएं सहज रूप से पूरी हो पा रही हैं। वे अब परिवार के आर्थिक निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी उनका सम्मान बढ़ा है। आज उषा अपने गांव की अन्य महिलाओं को स्वसहायता समूह से जुड़ने, बचत करने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
