मृत हितग्राही के नाम पर प्रधानमंत्री आवास—सरकारी योजना में “जिंदा” हुआ भ्रष्टाचार, टूरासेमरिया
में खुला बड़ा खेल
रज्जू बंजारे “वैभवी टाइम्स”
बेमेतरा। गरीबों को पक्की छत देने की मंशा से चलाई जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना बेमेतरा जिले में भ्रष्टाचारियों के लिए कमाई का जरिया बनती जा रही है। नवागढ़ ब्लॉक अंतर्गत वर्तमान ग्राम पंचायत टुरासेमरिया से सामने आया।
मामला न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जानकारी के अनुसार श्वेता नामक हितग्राही की कोरोना काल में वर्ष 2021 में मृत्यु हो चुकी थी,
लेकिन हैरत की बात यह है कि मृत व्यक्ति के नाम से वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री आवास का पंजीयन कर दिया गया। पंजीयन के वक्त उनका नॉमिनी नहीं भरा गया
इसके बाद वर्ष 2025 में श्वेता के स्थान पर उसके परिजनों को खड़ा कर जियो टैगिंग की गई, और डीबीटी (DBT) के माध्यम से आवास की तीनों किस्तों की राशि भी निकाल ली गई।
मामले की गंभीरता यहीं खत्म नहीं होती। कागजों में नाम श्वेता का दर्ज है, जबकि बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति का बताया जा रहा है, और पूरे आवास को पूर्ण (कंप्लीट) घोषित कर दिया गया है। सवाल यह है कि जब हितग्राही जीवित ही नहीं थी, तो पंजीयन, जियो टैगिंग, डीपीआर, किस्त भुगतान और पूर्णता प्रमाण पत्र जैसी सभी प्रक्रियाएं कैसे पूरी हो गईं?
स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों का आरोप है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में अभियंता, नोडल,रोजगार सहायक, आवास मित्र तथा जनपद पंचायत नवागढ़ के आवास विभाग के ब्लॉक समन्वयक की सीधी मिलीभगत सामने आ रही है। बिना भौतिक सत्यापन, बिना मृत्यु प्रमाण पत्र की जांच और बिना आधार–खाता मिलान के इस तरह का भुगतान होना, सामान्य लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
विडंबना यह है कि जहां वास्तविक पात्र गरीब परिवार वर्षों से आवास के लिए चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मृत व्यक्ति के नाम पर मकान खड़ा कर दिया गया। यह गरीबों के हक पर डाका और सरकारी योजनाओं की आत्मा के साथ खुला खिलवाड़ है।
अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासन के सामने है—
क्या दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
यदि इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि गरीबों के नाम पर चलने वाली योजनाएं भ्रष्टाचारियों की तिजोरी भरने का साधन बन चुकी हैं।
