बेमेतरा से 53,947 क्विंटल धान गायब, 17 करोड़ का खेल — कार्रवाई के नाम पर सिर्फ निलंबन
रज्जू बंजारे “वैभवी टाइम्स”
बेमेतरा। छत्तीसगढ़ को देश भर में धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन इस कटोरे में छेद करने में प्रदेश के जिला विपणन तंत्र कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बेमेतरा जिले में सामने आया ताजा मामला इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है, जहां सरदा लेंजवरा में संचालित संग्रहण केंद्र से 53,947 क्विंटल धान गायब पाया गया है।
इस घोटाले की अनुमानित राशि करीब 17 करोड़ रुपये बताई जा रही है।इतनी बड़ी मात्रा में धान का “हवा हो जाना” सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित बंदरबांट की ओर सीधा इशारा करता है। सवाल यह है कि जब धान का एक-एक दाना ऑनलाइन सिस्टम, रजिस्टर, परिवहन पर्ची और निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज रहता है, तो फिर हजारों क्विंटल धान गायब कैसे हो गया?कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति मामला उजागर होते ही सरदा लेंजवरा केंद्र प्रभारी नितीश पाठक को निलंबित कर दिया गया।
लेकिन 17 करोड़ के घोटाले में सिर्फ एक प्रभारी का निलंबन क्या पर्याप्त है?क्या इतनी बड़ी राशि का धान अकेले एक व्यक्ति की जेब में चला गया?हर जिले में एक-सी कहानी यह कोई पहला मामला नहीं है।
कवर्धा हो या महासमुंद, बेमेतरा हो या अन्य जिले—हर जगह कहानी एक-सी है, फर्क सिर्फ आंकड़ों का है।कहीं हजारों क्विंटल, कहीं लाखों का नहीं बल्कि सीधे करोड़ों का घोटाला।
जिला विपणन अधिकारी क्यों सवालों से बाहर?
धान खरीदी, भंडारण और संग्रहण की पूरी निगरानी जिला विपणन अधिकारी और संबंधित प्रशासनिक तंत्र के अधीन होती है। फिर यह कैसे मान लिया जाए कि—निरीक्षण नहीं हुआ स्टॉक मिलान नहीं हुआ चेतावनी के संकेत नहीं मिले सच यह है कि प्रशासनिक मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी बंदरबांट संभव ही नहीं है।
किसान का धान, अफसरों की कमाई?
जिस धान को किसान खून-पसीने से उपजाता है, वही धान कुछ अधिकारियों के लिए कमाई का साधन बनता जा रहा है।और हर बार की तरह—एक अधिकारी निलंबित जांच के आदेश और फिर सन्नाटा अब सवाल यह नहीं है कि कितना धान गायब हुआ,सवाल यह है कि इस धान के कटोरे को छेदने वालों पर कब तक पर्दा डाला जाता रहेगा?
17 करोड़ का यह मामला चेतावनी है—अगर अब भी सिर्फ निलंबन से काम चलाया गया, तो अगला घोटाला इससे भी बड़ा होगा।
