139 लाख मीट्रिक टन खरीदी का दावा, लाखों किसान अब भी परेशान
रज्जू बंजारे “वैभवी टाइम्स”
रायपुर /बेमेतरा | छत्तीसगढ़ में धान खरीदी प्रक्रिया समाप्त होते ही किसानों की परेशानी और सियासी टकराव दोनों तेज हो गए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के बड़े बयान के बाद जहां सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में करीब ढाई महीने तक लगातार धान खरीदी की गई और सरकार ने पूरी कोशिश की कि एक-एक किसान का धान खरीदा जा सके। उनके अनुसार, इस खरीदी सत्र में प्रदेशभर में लगभग 140 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और यदि किसानों से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं तो उन पर विचार किया जाएगा।
धान खरीदी बंद, संकट शुरू
सरकारी घोषणा के उलट, धान खरीदी बंद होते ही किसानों का संकट गहराने लगा है। रायपुर, बेमेतरा सहित आसपास के जिलों में सैकड़ों किसान अब भी अपने घरों और खलिहानों में धान जमा किए बैठे हैं। राज्यभर में ऐसे किसानों की संख्या लाखों में होने का दावा किया जा रहा है, जिनका धान अब तक नहीं बिक सका।
धान खरीदी की अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर कांग्रेस और किसान संगठनों ने लगातार दबाव बनाया, लेकिन सरकार ने इस पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया। नाराज किसानों ने अब सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। महासमुंद और कवर्धा में हुए प्रदर्शन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।
दीपक बैज का तीखा हमला
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि धान खरीदी को जानबूझकर समय से पहले बंद किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल 53 दिनों तक धान खरीदी की और अपने घोषित लक्ष्य से करीब 25 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीदा।
बैज ने यह भी कहा कि पिछले वर्ष भी सरकार ने 9 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीदा था। नई व्यवस्था और एग्री-स्टैक पोर्टल की बाध्यता के चलते 5 लाख से अधिक किसान पंजीयन से वंचित रह गए, जिससे वे अपना धान बेच ही नहीं पाए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब 29 जिलों में धान खरीदी घट गई, तब सरकार किस बात का जश्न मना रही है? बैज ने इसे किसानों के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से सार्वजनिक माफी की मांग की।
बचा धान खरीदेगा कौन?
कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री स्वयं यह घोषणा कर चुके थे कि किसानों का बचा हुआ धान खरीदा जाएगा, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारियों ने इस निर्देश को गंभीरता से नहीं लिया।
अब कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ने की तैयारी में है और कांग्रेस विधायक इसे विधानसभा के भीतर भी जोर-शोर से उठाएंगे।
खाद्य मंत्री का पलटवार
सरकार की ओर से जवाब देते हुए खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि राज्य में 139 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है और बारदाना या भुगतान को लेकर कहीं कोई संकट नहीं है।
मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने कांग्रेस नेताओं का भी धान खरीदा है, विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए सरकार को बदनाम कर रहा है।
बड़ा सवाल अब भी कायम
सरकारी आंकड़ों और विपक्ष के आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है—
जो किसान अब भी धान लेकर बैठे हैं, उनका धान आखिर कब और कौन खरीदेगा?
आने वाले दिनों में यह मुद्दा सिर्फ किसानों की नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बनने वाला है।
