सुरक्षा का वादा, परिवार का साथ
पंकज कुमार बघेल / वैभवी टाइम्स
मुंगेली पुलिस
सुबह का समय है।
एक पिता रोज़ की तरह काम पर जाने की तैयारी कर रहा है।
बाइक स्टार्ट हो चुकी है, लेकिन हेलमेट हाथ में नहीं है।
तभी उसकी नन्ही-सी बेटी घर के अंदर से दौड़ती हुई आती है और अपने छोटे हाथों से हेलमेट थमाते हुए कहती है—
“पापा, इसे पहन लो… जल्दी वापस आना।”
उस पल पिता को एहसास होता है—
हेलमेट सिर्फ़ एक सामान नहीं,
वह उसके परिवार की उम्मीदों की ढाल है।
आज स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले आप सभी छात्र–छात्राओं से एक सवाल—
क्या हेलमेट पहनना सिर्फ़ चालान से बचने के लिए है?
या फिर अपने माता-पिता, भाई-बहन और दोस्तों के लिए ज़िम्मेदारी निभाने का तरीका है?
हर दिन सड़क दुर्घटनाओं में
कई सपने अधूरे रह जाते हैं,
कई परिवार इंतज़ार करते रह जाते हैं,
सिर्फ़ इसलिए क्योंकि
“थोड़ी दूर ही तो जाना था” सोचकर हेलमेट नहीं पहना गया।
याद रखिए—
आपकी ज़िंदगी सिर्फ़ आपकी नहीं है।
आपकी एक लापरवाही
किसी माँ की मुस्कान छीन सकती है,
किसी पिता का सहारा तोड़ सकती है,
और किसी बहन या भाई की दुनिया बदल सकती है।
आज का संकल्प
हम सभी छात्र–छात्राएँ यह संकल्प लें कि—
✔ दोपहिया वाहन चलाते समय हमेशा हेलमेट पहनेंगे
✔ अपने दोस्तों को भी हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करेंगे
✔ नियमों को बोझ नहीं, सुरक्षा की ताकत समझेंगे
हेलमेट डर से नहीं, समझदारी से पहनिए।
घर कोई इंतज़ार कर रहा है।
मुंगेली पुलिस — सुरक्षित छात्र, सुरक्षित भविष्य 🚦
